मुंशी प्रेमचंद जी के अनमोल विचार - Munshi Premchand Quotes in Hindi

Munshi Premchand Quotes : मुंशी प्रेमचंद ऐसे लेखक हैं, जिनकी लिखी कहानियां और उपन्यास हिंदी और उर्दू जानने और पढ़ने वाले हर व्यक्ति ने कभी न कभी जरूर पढ़ी होगी | मुंशी प्रेमचंद जी का  का जन्म 31 जुलाई 1880 को वाराणसी के नजदीक गांव लमही में हुआ था। आज हम आपको मुंशी प्रेमचंद जी के अनमोल विचार के बारे में बता रहे हैं जिन्हें अपनाकर आप अपना जीवन सफल कर सकते हैं




1.जब हम कोई काम करने की इच्छा करते हैं तो शक्ति अपने आप ही आ जाती है। - मुशी प्रेमचंद (Munshi Premchand )

2.खाने और सोने का नाम जीवन नहीं है, जीवन नाम है- आगे बढ़ते रहने की लगन । - मुशी प्रेमचंद (Munshi Premchand )

3.जहां भावों का संबंध है वहां तर्क और न्याय से काम नहीं चलता। - मुशी प्रेमचंद (Munshi Premchand )

4.यदि झूठ बोलने से किसी की जान बचती हो तो, झूठ पाप नहीं पुण्य है। - मुशी प्रेमचंद (Munshi Premchand )

5.नारी और सब कुछ बर्दाश्त कर लेगी, पर अपने मायके की बुराई कभी नहीं। - मुशी प्रेमचंद (Munshi Premchand )

6.अन्याय को बढ़ाने वाले कम अन्यायी नहीं - मुशी प्रेमचंद (Munshi Premchand )

7.जीवन में सफल होने के लिए ज्ञानवान और शिक्षित होना जरुरी है, सिर्फ डिग्रियां लेना काफी नहीं होता। - मुशी प्रेमचंद (Munshi Premchand )

8.शत्रु का अंत शत्रु के जीवन के साथ ही हो जाता है। - मुशी प्रेमचंद (Munshi Premchand )

9.आलस्य वह रोग है जिसका रोगी कभी नहीं संभलता। - मुशी प्रेमचंद (Munshi Premchand )

10.क्रोध में व्यक्ति अपने मन की बात नहीं कहता, वह तो केवल दूसरों का दिल दुखाना चाहता है। - मुशी प्रेमचंद (Munshi Premchand )

 11.चापलूसी नामक ज़हरीला प्याला आपको वह तबतक नुकसान नहीं पहुंचा सकता, जबतक कि आपके कान उसे अमृत समझकर पी न जाएं। - मुशी प्रेमचंद (Munshi Premchand )

12.विपत्ति से बढ़कर अनुभव सिखाने वाला कोई स्कूल आज तक नहीं खुला, और न ही खुलेगा | - मुशी प्रेमचंद (Munshi Premchand )

13.धन को गवाँँकर अपनी आत्मा को पा लेना , यह कोई महंगा सौदा नहीं। - मुशी प्रेमचंद (Munshi Premchand )

14.मुहब्बत अमृत की बूंद के समान है जो मरे हुए भावों को जिंदा कर देती है। - मुशी प्रेमचंद (Munshi Premchand )

15.प्रेम एक ऐसा बीज है, इसे एक बार ज़माने के बाद फिर बड़ी मुश्किल से उखड़ता है। - मुशी प्रेमचंद (Munshi Premchand )

16.दूसरो को लूटने में नहीं बल्कि दूसरो को सुख देने में जीवन का असली सुख है। - मुशी प्रेमचंद (Munshi Premchand )

17.बुराई करने में और आलोचना करने में बहुत फर्क होता है | बुराई एक दूसरे को अलग कर देती है , लेकिन आलोचना क़रीब ले आती है | - मुशी प्रेमचंद (Munshi Premchand )

18.एक अनाथ बच्चे का हृदय चित्र पर पड़े हुए साधारण परदे के समान होता है जो हवा के साधारण झकोरे से हट जाता है | - मुशी प्रेमचंद (Munshi Premchand )

19.दुखियारों को हमदर्दी के आँसू भी बहुत प्यारे लगते है | - मुशी प्रेमचंद (Munshi Premchand )

20.प्रेम नामक रोटी में अमृत रहता है , फिर वह रोटी चाहे गेहू की हो या फिर बाजरे की | - मुशी प्रेमचंद (Munshi Premchand )

21.मासिक वेतन पूरनमासी चाँद की तरह होता है , जो दिखाई सिर्फ एक दिन होता है , लेकिन धीरे-धीरे खत्म हो जाता है | - मुशी प्रेमचंद (Munshi Premchand )

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